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फाइलेरिया कà¥à¤¯à¤¾ है? What is Filariasis (Filaria)?
फाइलेरिया दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में विकलांगता और विरूपता बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ वाला सबसे बड़ा रोग है (इसे à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ के रूप में à¤à¥€ देखा जाता है)। यह à¤à¤• पैरासाइट डिजिट है जो कि धागे के समान दिखाई देने वाले निमेटोड कीड़ों (Nematode Worms) के शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने की वजह से होती है। निमेटोड कीड़े परजीवी मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ (Wuchereria Bancrofti or Rugia Malayi) और खून चूसने वाले कीटों के जरिठइंसान के शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर सकते हैं। इन निमेटोड कीड़ों में फिलेरी वà¥à¤šà¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤… बैंकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤Ÿà¥€ (Filariae-Wuchereria Bancrofti), बà¥à¤°à¥‚गिआ मलाई (Brugia Malayi) और बà¥à¤°à¥‚गिआ टिमोरि (Brugia Timori) शामिल है। फाइलेरिया मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से वà¥à¤šà¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤… बैंकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤Ÿà¥€ (Wuchereria Bancrofti) परजीवी कीड़े की वजह से होता है।
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में फाइलेरिया मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से गरीब लोगों और उषà¥à¤£à¤•टिबंधीय कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में अधिक पाया जाता है। फाइलेरिया को फीलपाà¤à¤µ (Elephantiasis), शà¥à¤²à¥€à¤ªà¤¦ (slippad) के नाम से जाना जाता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इसे सामानà¥à¤¯ तौर पर हाथी पाà¤à¤µ के नाम से जाना जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस रोग में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का पाà¤à¤µ हाथी के पाà¤à¤µ की तरह हो जाता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार का à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और परिवार कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ (Indian Ministry of Health and Family Welfare) इस रोग से लड़ने वालों के लिठमà¥à¤«à¥à¤¤ उपचार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता हैं। अकेले à¤à¤¾à¤°à¤¤ में ही करोड़ों लोगों को फाइलेरिया होने का जोखिम हैं।
फाइलेरिया के कितने पà¥à¤°à¤•ार है? How many types of Filariasis (Filaria) are there?
फाइलेरिया रोग तीन पà¥à¤°à¤•ार का होता है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निचे संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ किया गया है :-
लिमà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) : लिमà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• फाइलेरिया, हाथी पाà¤à¤µ का सबसे आम पà¥à¤°à¤•ार है। फाइलेरिया का यह पà¥à¤°à¤•ार वà¥à¤•ेरेरिया बैनà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤«à¥à¤Ÿà¥€ (Wuchereria Bancrofti), बà¥à¤°à¥à¤—िया मलाई (Brugia Malayi) और बà¥à¤°à¥à¤—िया टीमोरि (Brugia Timori) परजीवियों की वजह से होता है। यह कीड़े लिमà¥à¤« नोडà¥à¤¸ सहित लसीका पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ (Lymphatic System) को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। लिमà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• फाइलेरिया को à¤à¤²à¥€à¤«à¥‡à¤¨à¤Ÿà¤¾à¤¯à¤¸à¤¿à¤¸ (Elephantiasis) के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है।
सबकà¥à¤¯à¥‚टेनियस फायलेरियासिस (Subcutaneous Filariasis) : सबकà¥à¤¯à¥‚टेनियस फायलेरियासिस लोआ लोआ (eye worm), मैनसनैला सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥‡à¤°à¤•ा और ओनà¥à¤•ोसेरका वॉलà¥à¤µà¥à¤²à¤¸ (Onchocerca Volvulus) नामक परजीवियों के कारण हो सकता है। फाइलेरिया का यह पà¥à¤°à¤•ार मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से तà¥à¤µà¤šà¤¾ की निचली परत को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
सीरस कैविटी फाइलेरिया (Serous Cavity Filariasis) : सीरस कैविटी फाइलेरिया à¤à¥€ फाइलेरिया के पà¥à¤°à¤•ार की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आता है जो कि सबसे दà¥à¤°à¥à¤²à¤ है।
Note: - सबकà¥à¤¯à¥‚टेनियस फायलेरियासिस (Subcutaneous Filariasis) और सीरस कैविटी फाइलेरिया (Serous Cavity Filariasis) फाइलेरिया रोग के सबसे दà¥à¤°à¥à¤²à¤ पà¥à¤°à¤•ार है। फ़िलहाल इन दोनों के बारे में कोई खास जानकारी मौजूद नहीं है, इन दोनों पर शोध जारी है। लिमà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) सबसे आम फाइलेरिया है और इसके विषय में काफी जानकारी है। इस लेख में मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से लिमà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) के बारे में जानकारी दी गई है।
फाइलेरिया रोग कितना गंà¤à¥€à¤° है? How serious is Filariasis (Filaria)?
हाथी पाà¤à¤µ यानि फाइलेरिया रोग कई तरह से गंà¤à¥€à¤° है पहला यह कि इसका कोई इलाज मौजूद नहीं है, और दूसरा इसके पà¥à¤°à¤•ार। लेकिन अगर फाइलेरिया रोग के सबसे गंà¤à¥€à¤° रूप को देखा जाठतो वह निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ ही इससे होने वाली कà¥à¤°à¥‚पता है। इस रोग की वजह से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के पाà¤à¤µ और अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ अंग काफी कà¥à¤°à¥‚प हो जाते हैं, जिसकी वजह से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को शारीरिक और मानसिक दोनों समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करना पड़ता है। रोगी समाज से कटना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है और लोगों से मिलना à¤à¥à¤²à¤¨à¤¾ बंद कर देता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लोग उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी कलंक के रूप में देखते हैं। वहीं, à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कई कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में इसे ईशà¥à¤µà¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤•ोप के रूप में à¤à¥€ परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ किया जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है, कम जानकारी।
फाइलेरिया का हर पà¥à¤°à¤•ार अपने आप में गंà¤à¥€à¤° है और किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार का कोई सटीक उपचार मौजूद नहीं है, जिसकी मदद से इससे हमेशा के लिठछà¥à¤Ÿà¤•ारा मिल सके। यह लेख लिखे जाने तक इस गंà¤à¥€à¤° रोग से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने के लिठकोई टिका या दवा विकसित नहीं की गई है, जिसकी मदद से इससे हमेशा के लिठछà¥à¤Ÿà¤•ारा मिल सके।अगर किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को फाइलेरिया का कोई à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार हो जाता है उसे जीवन à¤à¤° उसके साथ जीवन बीतना पड़ता है। हाà¤, लेकिन कà¥à¤› दवाओं की मदद से इसके जोखिम कारकों और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से आराम मिल सकता है, लेकिन यह कà¤à¥€ जड़ से खतà¥à¤® नहीं होता। दवाओं के साथ-साथ फाइलेरिया रोगी को अपने रहन-सहन के तरीके और खान पान में कà¥à¤› बदलाव करने की à¤à¥€ जरूरत होती है, जिसकी मदद से रोगी परेशानियों को कà¥à¤› हद तक कम किया जा सकता है।
फाइलेरिया होने के कà¥à¤¯à¤¾ कारण है? What causes filariasis (Filaria)?
इस लेख के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही हमने आपको बताया था कि फाइलेरिया निमेटोड परजीवियों की वजह से होता है। निमेटोड परजीवी, मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ और अनà¥à¤¯ खून पीने वाले जीवों या कीड़ों की मदद से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं और फिर फाइलेरिया हो जाता है। इन निमेटोड परजीवियों निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कीड़े शामिल है जिनकी वजह से फाइलेरिया होता है :-
बैनà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤«à¥à¤Ÿà¥€ (Wuchereria Bancrofti)
बà¥à¤°à¥à¤—िया मलाई (Brugia Malayi)
बà¥à¤°à¥à¤—िया टीमोरि (Brugia Timori)
मैनसोनेलà¥à¤²à¤¾ (Mansonella)
ओनà¥à¤•ोसेरका वॉलà¥à¤µà¥à¤²à¤¸ (Onchocerca Volvulus)
फाइलेरिया होने पर कà¥à¤¯à¤¾ लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं? What are the symptoms of filariasis (Filaria)?
हाथी पाà¤à¤µ यानि फाइलेरिया या à¤à¤²à¤¿à¤«à¥‡à¤‚टियासिस होने पर कई तरह के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते सकते हैं जो कि इस रोग के हर पà¥à¤°à¤•ार के साथ बदल सकते हैं, लेकिन मà¥à¤à¥€ रूप से निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित पà¥à¤°à¤•ार से ही लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं।
फाइलेरिया होने पर सबसे आम लकà¥à¤·à¤£ शरीर के अंगों में सूजन है। सूजन निमà¥à¤¨ में होती है:
पैर
गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤‚ग
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚
बाà¤à¤¹
सूजन सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पैर में आती है। पैरों में सूजन और à¤à¥€ कई कारणों की वजह से आ सकती हैं, लेकिन फाइलेरिया होने पर केवल à¤à¤• ही पैर में सूजन आती है। अगर दà¥à¤¸à¤°à¥‡ पैर में सूजन आ à¤à¥€ जाठतो वह बहà¥à¤¤ ही कम होती है। शरीर के किसी à¤à¥€ बंद आई लगातार बà¥à¤¤à¥€ रहती है और सूजन वाले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ à¤à¥€ हो सकता है।
विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें :- अगर किसी महिला के बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में लगातार सूजन बन रही है तो इसे नजरअंदाज बिलà¥à¤•à¥à¤² न करें। यह फाइलेरिया का लकà¥à¤·à¤£ हो सकता है। सूजन बढ़ने की वजह से बà¥à¤²à¤¡ सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ में कमी होने से बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² इंफेकà¥à¤¶à¤¨ तक हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में ततà¥à¤•ाल डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फाइलेरिया का कोई इलेाज नहीं होता है।
फाइलेरिया होने पर सूजन के अलावा तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधित निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ दिखाई देते हैं :-
सूखी तà¥à¤µà¤šà¤¾
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का सामानà¥à¤¯ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मोटा होना
छाले-यà¥à¤•à¥à¤¤ तà¥à¤µà¤šà¤¾ नज़र आना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग सामानà¥à¤¯ से अधिक गहरा होना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ खड़ी-खड़ी नज़र आना
कà¥à¤› लोग अतिरिकà¥à¤¤ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का अनà¥à¤à¤µ करते हैं, जैसे बà¥à¤–ार, पेट दरà¥à¤¦, à¤à¥‚ख न लगना और ठंड लगना। à¤à¤²à¤¿à¤«à¥‡à¤‚टियासिस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ वाले लोगों को दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा à¤à¥€ बढ़ जाता है।
फाइलेरिया के जोखिम कारक कà¥à¤¯à¤¾ है? What are the risk factors for Filariasis (Filaria)?
à¤à¤²à¥€à¤«à¥ˆà¤‚टियासिस यानि फाइलेरिया किसी à¤à¥€ उमà¥à¤° के लोगों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। यह महिलाओं और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ दोनों में दिखाई देता है। यह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उषà¥à¤£à¤•टिबंधीय और उपोषà¥à¤£à¤•टिबंधीय à¤à¤¾à¤—ों में अधिक आम है, जैसे:
अफà¥à¤°à¥€à¤•ा
à¤à¤¾à¤°à¤¤
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ – पूरà¥à¤µ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ अमेरिका
फाइलेरिया के सामानà¥à¤¯ जोखिम कारकों में निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित शामिल हैं :
मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के लिठउचà¥à¤š जोखिम होना
असà¥à¤µà¤šà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में रहना
उषà¥à¤£à¤•टिबंधीय और उपोषà¥à¤£à¤•टिबंधीय कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में लंबे समय तक रहना
फाइलेरिया का निदान कैसे किया जाता है? How is Filariasis diagnosed?
फाइलेरिया का निदान करने के लिठनिमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित जांच करवाई जा सकती है :-
माइकà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤²à¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ जाचने के लिठलिठरकà¥à¤¤ जांच – रोगी के रकà¥à¤¤ में माइकà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤²à¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है या नहीं इसे देखने के लिठरकà¥à¤¤ की सूकà¥à¤·à¥à¤® जांच की जाती है। इस जांच के लिठरकà¥à¤¤ का नमूना केवल रात के समय लिया जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लिंफ़ के (लिमà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤•) फिलेरिया का कारण होता है वो रकà¥à¤¤ में रात को पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° करता है
इमà¥à¤¯à¥‚नोडायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• टेसà¥à¤Ÿ (Immunodiagnostic tests) – इस जांच में रकà¥à¤¤ में यह देखा जाता है कि रकà¥à¤¤ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¥€ (à¤à¤‚टीबॉडी) है या नहीं।
रकà¥à¤¤ में फाइलेरिया परिसंचरण करने वाला पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¤¨ (Circulating Filarial Antigen) है या नहीं यह जानने के लिठटेसà¥à¤Ÿ किठजाते हैं।
फाइलेरिया का उपचार कैसे किया जाता है? How is filariasis treated?
हम इस संबंध में पहले ही जानकारी दे चà¥à¤•े हैं कि इस रोग को कà¤à¥€ à¤à¥€ जड़ से खतà¥à¤® नहीं किया जा सकता। हाà¤, इससे बचाव संबंध है, आप à¤à¤¸à¥‡ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में रहते हैं जहाठयह रोग सामानà¥à¤¯ है तो आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° से इस बारे में बात करें और संà¤à¤µà¤¿à¤¤ उपायों पर काम करें। à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार à¤à¤¸à¥‡ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में विशेष रूप से कई योजनाà¤à¤‚ चला रही है जिससे फाइलेरिया को आगे बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ से रोका जा सके, जिसमें काफी सफलता à¤à¥€ नज़र आ रही है।
फाइलेरिया या à¤à¤²à¤¿à¤«à¥‡à¤‚टाइसिस के उपचार निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीके से किया जा सकता है :-
à¤à¤‚टीपैरासिटिक दवाà¤à¤‚, जैसे – डायथाइलकारà¥à¤¬à¤¾à¤®à¤¾à¤œà¤¼à¤¿à¤¨ (डीईसी) Diethylcarbamazine (DEC), मेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¤¨ Mectizan, और à¤à¤²à¥à¤¬à¥‡à¤‚डाज़ोल (अलà¥à¤¬à¥‡à¤¨à¥à¤œà¤¼à¤¾) Albendazole (Albenza)
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को साफ करने के लिठअचà¥à¤›à¥€ सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का उपयोग करें।
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ को ऊपर उठा कर रखना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में घावों की देखà¤à¤¾à¤² करते रहें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ के आधार पर वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करें, जितना हो सके सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहें।
अगर फाइलेरिया के मामला काफी गंà¤à¥€à¤° हो जाता है तो à¤à¤¸à¥‡ में सरà¥à¤œà¤°à¥€ à¤à¥€ की जा सकती है। जिसमें पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के लिठपà¥à¤¨à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ सरà¥à¤œà¤°à¥€ या पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ लसीका ऊतक को हटाने के लिठसरà¥à¤œà¤°à¥€ की जा सकती है।
फाइलेरिया होने पर à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• और मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• उपचार à¤à¥€ दिया जाना जरूरी है, ताकि रोगी खà¥à¤¦ को कलां के रूप में न देखें। इसके लिठपरिवार और रोगी दोनों की काउंसलिंग की जा सकती है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, “पैर को रगड़ कर साफ करने से परहेज करना चाहिà¤à¥¤ पैरों को बराबर रख कर आरामदेह मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में बैठना चाहिà¤à¥¤ पटà¥à¤Ÿà¥‡ वाला ढीला चपà¥à¤ªà¤² पहनने के साथ सूजन वाली जगह को हमेशा चोट से बचाना चाहिà¤à¥¤â€œ
फाइलेरिया से बचाव कैसे करें? How to prevent filariasis?
अगर आप फाइलेरिया à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ रोग है जिसका कोई उपचार नहीं है। इस लिठसबसे उतà¥à¤¤à¤® है कि इससे बचाव किया जाà¤, जिसके लिठआप निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीके अपना सकते हैं :-
शाम के वकà¥à¤¤ बाहर या घर में पूरे कपड़े पहनें।
सोने से पहले मचà¥à¤›à¤°à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ लगाà¤à¤‚।
घर में मचà¥à¤›à¤° à¤à¤—ाने वाली लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ दवाओं का उपयोग करें।
बीच-बीच में बॉडी चेकअप के लिठà¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जरूर जाà¤à¤‚।
अगर आपको सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में बदलाव या दरà¥à¤¦ महसूस हो रहा है तो इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
अगर आप à¤à¤¸à¥€ इलाके में रहते हैं जहाठफाइलेरिया होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है तो à¤à¤¸à¥‡ में मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ और अनà¥à¤¯ कीटों से जितना हो सके उतना बचाव करें।
मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव करने के लिठहमेशा पà¥à¤°à¥‡ कपड़े पहने और मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव करने वाली दवाओं या कà¥à¤°à¥€à¤® का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
फाइलेरिया होने पर कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤? What should I eat when I have filariasis?
फाइलेरिया होने पर पूछे जाना वाला यह सबसे बड़ा सवाल है। अगर आप इस गंà¤à¤°à¥€ रोग से जूठरहे हैं तो सबसे बेहतर होगा कि आप इस बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपकी तमाम जांच के आधार पर इस बारे में सटीक और पà¥à¤°à¥€ जानकारी दे सकते हैं। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आहार से जà¥à¥œà¥€ कोई à¤à¥€ जानकारी देने के लिठरोगी की सà¤à¥€ जांच रिपोरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को देखा जाना सबसे जरूरी होता है।
वैसे सामानà¥à¤¯ तौर पर फाइलेरिया रोगी को उन सà¤à¥€ चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से शरीर में सूजन बà¥à¥‡à¥¤ अगर फाइलेरिया के कारण रोगी के शरीर में जखà¥à¤® होने लग गये हैं तो à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में रोगी को उन सà¤à¥€ चीजों से à¤à¥€ दूर रहने की सलाह दी जाती है जिसकी वजह से उनके शरीर में हà¥à¤ जखà¥à¤®à¥‹à¤‚ में जलन होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाठया पस पड़ जाà¤à¥¤ उदाहरण के लिठदूध, अचार और तेज मसालेदार खाना।
सामानà¥à¤¯ रूप से फाइलेरिया होने पर रोगी को मौसमी और लोकल आहार लेने की सलाह दी जाती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह आहार उनके शरीर के लिठसबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उपयोगी होता है। फाइलेरिया के इलाज के लिठअपने रोज के खाने में कà¥à¤› आहार जैसे लहसà¥à¤¨, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€ आदि शामिल करें। इनमें विटामिन ठहोता है और बैकà¥à¤Ÿà¤°à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मारने के लिठविशेष गà¥à¤£ à¤à¥€ होते हैं।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में फाइलेरिया के लिठकà¥à¤¯à¤¾ उपाय है? What is the remedy for filariasis in Ayurveda?
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में à¤à¥€ फाइलेरिया के लिठकोई सटीक उपचार मौजूद नहीं है। लेकिन हाà¤, इसके लिठकà¥à¤› खास उपाय मौजदू है जिनकी मदद से इस रोग से थोड़ा आराम मिल सकता है। निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कà¥à¤› आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• उपायों की मदद से फाइलेरिया से बचाव किया जा सकता हैं :-
लौंग Cloves – अगर आप फाइलेरिया से जूठरहे हैं या à¤à¤¸à¥‡ इलाके में रहते हैं जहा फाइलेरिया होने का खतरा रहता है तो आप अपने खाने में लौंग का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। लौंग में मौजूद à¤à¤‚जाइम परजीवी के पनपते ही उसे खतà¥à¤® कर देते हैं और बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीके से परजीवी को रकà¥à¤¤ से नषà¥à¤Ÿ कर देते हैं।
काले अखरोट का तेल black walnut oil – अखरोट के अंदर खून साफ़ करने और खून में मौजूद परजीवियों को खतà¥à¤® करने की ताक़त होती है। à¤à¤¸à¥‡ में आप फाइलेरिया से अपना बचाव करने के लिठकाले अखरोट के तेल को à¤à¤• कप गरà¥à¤® पानी में तीन से चार बूंदे डालकर ले सकते हैं। अखरोट के अंदर मौजूद गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से खून में मौजूद कीड़ों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने लगती है और धीरे धीरे à¤à¤•दम खतà¥à¤® हो जाती है। जलà¥à¤¦ परिणाम के लिठकम से कम छह हफà¥à¤¤à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ इस उपाय को करें। इसे दिन à¤à¤° में कितनी बार इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना है आप इस बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
आंवला Gooseberry – फाइलेरिया होने पर आंवला à¤à¥€ लिया जा सकता है, इसमें पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन सी होता है। इसके अलावा इसके अंदर à¤à¤¨à¥à¤¥à¥‡à¤²à¤®à¤¿à¤‚थिंक (Anthelmintic) à¤à¥€ होता है जो कि घाव को जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करता है।
अशà¥à¤µà¤—ंधा Ashwagandha – आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में अशà¥à¤µà¤—ंधा सबसे ताक़तवर औषधियों में शामिल की जाती है। यह इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को मजबूत करने में काफी मददगार होती है। फाइलेरिया होने पर कमजोर हो चà¥à¤•े इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को मजबूत करने के लिठअशà¥à¤µà¤—ंधा का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है।
बेल पतà¥à¤° के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का लेप bael leaf paste – धारà¥à¤®à¤¿à¤• रूप से बेल पतà¥à¤° का पेड़ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में काफी महतà¥à¤µ रखता है। वहीं यह औषधि के रूप में à¤à¥€ काफी खास हैं। बेल पतà¥à¤° के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से बने लेप की मदद से शरीर में आई किसी à¤à¥€ सूजन से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाया जा सकता है। इसके लिठआप बेल पतà¥à¤° के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को साफ़ कर के उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤•ा कूट लें फिर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® कर लें फिर तैयार लेप को सूजन वाली जगह पर लगा लें।
अदरक Ginger – फाइलेरिया से निजात के लिठसूखे अदरक का पाउडर या सोंठका रोज गरम पानी से सेवन करें। इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नषà¥à¤Ÿ होते हैं और मरीज को जलà¥à¤¦à¥€ ठीक होने में मदद मिलती है।
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